Friday, March 30, 2012

हमें अपने आप को पहचानना है,

क्यों भेड़ बने हुए हो तुम तो शेर के बच्चे हो,,,,,

       एक गावं में एक चरवाहा रहता था  बह रोज अपनी भेड़ों को चराने के लिए जंगल में एक बहुत ही सकरी नदी किनारे ले जाया करता था,बहां घना जंगल भी था,,जंगल में खतरनाक जानवर भी रहते थे,नदी में अनेक जंगली जनावर पानी पीने आया करते थे,वह बड़ी साबधानी पूर्वक अपनी भेड़ों की निगरानी रखता था,एक दिन नदी के उस पार एक शेरनी दिखाई पड़ी शभी भेड़ें उसे देखकर गावं की ओर तेज़ी से भागने लगीं,शेरनी ने एक ही छलांग में नदी को पार कर लिया,चरवाहा भी झाड़ियों में छिप गया, उस ने सोचा आज कोई घटना घटने वाली है,लेकिन जैसा उसने सोचा था  वैसा नहीं हुआ,शेरनी जहाँ कूदी थी वहीँ पड़ी रही,चरवाहा काफी देर तक देखता रहा मगर वह टस से मस नही हुई,उसे कुछ संका हुई और  झाडियो में दुबके-दुबके धीरे-धीरे उसके पास आया,उसने देखा शेरनी एक बच्चे को जन्म देकर वास्तव में परलोक सिधार चुकी है,शेरनी गर्भनि थी,शायद छलांग उसके लिए मरने का कारण बन गयी,चरवाहा शेर के शावक को अपने साथ घर ले आया,और उसको भेड़ों का दूध पिलाकर पालने लगा,जब शावक थोडा बड़ा हुआ तो उसने उसे भेड़ों के साथ भेड़ों के दल में सामिल कर लिया,प्रतिदिन शेर का शावक भेड़ों के साथ चरागाह जाता और घास चरता और भेड़ों की तरह ही मिमयाता था,शेरका बच्चा होते हुए भी मिमयाता था,
 गर्मियों के दिन थे एक दिन वह अपनी भेड़ों को चारागाह में छोड़कर एक पेड़ की छाव में लेट गया,अचानक उसे एक शेर की दहाड़  सुनाई दी शभी भेड़े भी मिमयाती हुई गावं की और दौड़ रही थी,वह भी भेड़ों के पीछे भगा,उसे यह देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ,की शेर ने एक भी भेड़ को नहीं पकड़ा,शेर ने शेर के शावक को अपने मुह में दबा रखा है,और उसे नदी के पार ले जा रहा है,दरअसल शेर को अपनी ही प्रजाति के बच्चे को भेड़ो के साथ घास खाते और मिमयाते बिलकुल अच्छा नहीं लगा,इसीलिए वह उसे समझा देना चाहता है की बह मांसाहारी शेर का बच्चा है,दूर पहाड़ी की तलहटी में जाकर जोर से गर्जना की और फिर शावक  से बोला की तू भी इसी तरह जोर से गर्जना कर, शावक  शेर की भयंकर गर्जना सुनकर डर गया,लेकिन वह कुछ आशंकित भी हुआ उसे विस्वास नहीं हुआ,यह देखकर शेर को गुस्सा आया और शावक को घसीटता हुआ नदी के पास ले गया,जहाँ पानी में दोनों के प्रतिबिम्ब दिखाई दे रहे थे,और पानी की ओर देखता हुआ बोला देख बेटा हम पानी में  एक जैसे दिखाई दे रहे हैं,तू भेड़ों की तरह नहीं है,शेर के शावक  को तब कही थोडा विश्वास हुआ,शेर जंगल से मांस का एक टुकड़ा ले आया,थोड़ा खुद खाया थोड़ा  शावक  के मुह में जबरदस्ती ठूंस दिया,मांश का स्वाद चखते ही शावक के समझ में गया की वह भी शेर की प्रजाति का ही है,खुश होकर वह जोर-जोर से दहाड़ मारकर गरजने लगा,फिर उसने कभी भेड़ों के झुण्ड की तरफ मुड़कर नहीं देखा,शेर की तरह छलांग लगता हुआ वास्तविक घने जंगल में चला गया,हम में से अधिकांश लोग शेर के उस सम्मोहित बच्चे की तरह हम अपने आप को दुर्बल ओर असहाय समझते हैं हमें स्वम के बिषय में अपनी धरणा बदलने लिए एक महान ज्ञानी की जरूरत होती है,ज्ञानी लोग सामान्य लोगो में साहस तथा ज्ञान का संचार करते हैं,इसी प्रकार ज्ञानी महापुरुषों द्वारा समय-समय पर व्यक्तियों को और संसार को जाग्रत किया जाता है,
   कब तक शेर होते हुए भेडों के झुण्ड में चरते फिरेंगे हम शेर के बच्चे है,शेर की तरह शेर की भाषा जाने।इस भाग दौड़ की जिंदगी में कब तक पिसते रहेंगे,कब तक अपनी आत्मा को जन्म मरन के चक्कर लगवाते रहेंगे,इसलिए हमें अपनी आत्म उन्नति के लिए जरूर कुछ करना चाहिए ।
                  कब तक भेड़ बने रहेंगे हम हम तो शेर के बच्चे हैं ।

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