(2) आगे संतों की चेतावनी है,हमे कौन से देश में जाना है,हमरा वास्ता वहां किस के साथ पड़ेगा इस पर भी विचार करना अवश्यक है,ग्रन्थ-पोथियों में इनका कुछ-कुछ उल्लेख है,पर हम उनको कहानी या कल्पित कथाये समझकर या जीव को पापो से डराने के लिए या उनकी रूचि शुभ कार्यों की ओर लगाने के लिए मान लेते हैं,और फिर अपना मुख मोड़ लेते हैं,ध्यान नहीं देते,हमें मौत के दरवाजे को लाँघ कर उस पार जाना है,कोई इससे बच नहीं सकता संत कहते हैं मौत वह अंतिम शत्रु है,जिसपर हमें विजय प्राप्त करनी है,हमें इस बिषय पर आंखे बंद कर के नहीं बैठ जाना है,रोजमर्रा की परिस्थिति हमें बताती हैं,कि जब हमें किसी दूसरे देश जाना होता है,तो हम काफी समय पहले से ही तैयारी करनी शुरू कर देते हैं,साथ में ले जाने के लिए धन भी इकट्ठा कर लेते हैं,वहां पहुचने के लिए हमें कार,मोटर,हवाई जहाज से जाने की व्यवस्था करते हैं,पहले से ही किसी,रिश्तेदार को या किसी होटल आदि में रुकने की व्यवस्था करते है,पूरी तैयारी के साथ सारे इंतजाम करते हैं,संतों का कहना है,कि संसार में तो हम बहुत होशियारी दिखाते हैं,कोई यात्रा बिना विचारे नहीं करते,हमें किसी और देश में भी जाना हो तो किसी का मार्गदर्शक की व्यवस्था करलेते हैं,पर मौत के बाद का सफर जो सभी के सर पर मंडरा रहा है,जो अटल है जिस पर सभी बार-बरी से जारहे हैं,हमने उसके बारे में क्या व्यवस्था की है,??
thanks
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