(1) मौत क्या है,क्या हमें मौत के समय पीड़ा होती है,क्योकि यह तो अटल सत्य है,कि शभी को मरना है,मृत्यु के द्वार से शभी को गुजरना है,जो आत्मा इस इस शरीर में आयी है उसको इस शरीर को छोडना भी है,यह भी सब जानते हैं, कि एक दिन हमें जाना हैं,हमारा शरीर मिटटी का है,एक दिन मिटटी में ही मिल जाना हैं,लेकिन क्या यह पता है कि कहाँ जाना है,मृत्यु के बाद का सफ़र कैसा होगा,
"हम दूसरों के मरने पर रोते हैं ,हमको बैठ कर अपने आप पर भी रोना चाहिए,क्या इसके बारे में हमने सोचा है"
मौत क्या है मरते बक्त कितनी पीड़ा होती है,इस पीड़ा के बारे में,श्रीमदभागवत में उल्लेख आया है,कि मृत्यु के समय आत्मा के शरीर से निकलने में इतनी पीड़ा होती है ,जितनी कि एक लाख,बिच्छुओं के एक साथ डंक मारने से होती है, कुरान शरीफ में भी रूह के शरीर से अलग होने के दर्द का वर्णन है,वहां कहा गया है,प्राण निकलते समय इतना दर्द होता है,जितना कि काटों वाली छड़ी गुदा के मार्ग से डाल कर मुहँ के रास्ते खींचा जाय,गुरुवाणी में भी इसका कुछ अनुमान दिया गया है..क्रमशः
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