केवल प्रेम ही चैन और आनन्द देने वाला है,इसके बिना जीवन में कुछ भी नहीं,जिन्दगी सूखे रेगिस्तान की तरह है..स्वर्ग और वहां के सारे सुख किसी कम के नहीं,,प्रेम के बिना शाही महल भी श्मसान-भूमि और कब्रिस्थान से कम डरावने नहीं,यदि टूटी-फूटी झोपडी प्रेम के प्रकाश से प्रकाशवान है तो उससे उत्तम क्या हो सकता है प्रेम तो वह दुर्लभ धन है जिसके बिना कुछ भी नहीं,,जिसके होने पर सब कुछ है,जिसके ह्रदय में प्रेम का रस नहीं उस मनुष्य का जीवन निर्थक है......
यह ब्लॉग अनेक वेबसाइट, ब्लॉग, किताबों और हमारी सोंच का संगृहीत रूप है, जो की हमारे छोटे से मस्तिष्क की तुलनात्मक बल से परखे जाने पर सत्य पाया है !! आप से निवेदन है की आप भी इस पर विचार करें !!
Monday, January 16, 2012
प्रेम (Love)
केवल प्रेम ही चैन और आनन्द देने वाला है,इसके बिना जीवन में कुछ भी नहीं,जिन्दगी सूखे रेगिस्तान की तरह है..स्वर्ग और वहां के सारे सुख किसी कम के नहीं,,प्रेम के बिना शाही महल भी श्मसान-भूमि और कब्रिस्थान से कम डरावने नहीं,यदि टूटी-फूटी झोपडी प्रेम के प्रकाश से प्रकाशवान है तो उससे उत्तम क्या हो सकता है प्रेम तो वह दुर्लभ धन है जिसके बिना कुछ भी नहीं,,जिसके होने पर सब कुछ है,जिसके ह्रदय में प्रेम का रस नहीं उस मनुष्य का जीवन निर्थक है......
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