Monday, January 16, 2012

प्रेम (Love)


केवल  प्रेम ही  चैन  और आनन्द   देने  वाला  है,इसके  बिना जीवन में कुछ भी नहीं,जिन्दगी  सूखे रेगिस्तान   की  तरह   है..स्वर्ग  और वहां के सारे  सुख  किसी कम के  नहीं,,प्रेम के  बिना शाही महल भी श्मसान-भूमि  और कब्रिस्थान से कम डरावने   नहीं,यदि टूटी-फूटी झोपडी प्रेम के   प्रकाश   से प्रकाशवान है तो उससे उत्तम क्या हो  सकता  है प्रेम तो वह दुर्लभ  धन  है जिसके बिना कुछ भी नहीं,,जिसके होने पर सब कुछ है,जिसके ह्रदय में प्रेम का रस नहीं उस मनुष्य का जीवन निर्थक  है......    

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