हमें केवल उस हरी,परमात्मा की ही सेवा करनी चाहिए,जिसका कोई माता-पिता नहीं,जो सारे संसार को चला रहा है,और जो हमको खाने-पहनने के भोगों का रस प्रदान करता है,जो माता-पिता और परिवार का मेल मिलाता है,जो जल में थल में सर्वत्त्र जिसकी सत्ता काम कर रही है,सभी प्राणियों को रोजी-रोटी दे रहा है, हमें सब कुछ त्याग कर उस सर्वोच्च सत्ताधारी,श्री हरी परमपिता परमेश्वर की सेवा करनी चाहिए,क्योकि उसकी सेवा के फल स्वरूप काल हमको नहीं सता सकता वह उल्टा हमारी खिदमत में आ रहता है,
Thanks
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