ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम केवल पुस्तके ही नहीं,यह सुनने से भी मिल जाता है,
एक बिना आँखों वाले को देखे बह सुन-सुन कर बड़ा वक्ता बन जाता है सुनने से ज्ञान अपने अन्दर अधिक समाता है,जब सत्संग में खास बिषय पर चर्चा होती है तो,एक ही समय पर सब एक ही विचार वाले लोग एक ही बिषय पर सोचते हैं,उन शभी के विचारों की लहरे उस मंडल में विचरती रहती हैं,सभी उनके प्रभाव को ग्रहण करते है,जिसके फलस्वरूप वह बिषय हमारे अंदर गहराई तक समाता चला जाता है,इस प्रकार हमारे अन्दर जो भ्रम का मैल(अज्ञान रुपी अंधकार ) है वह दूर होता जाता है,और सुबुद्धि का प्रकाश फैलता जाता है,
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