जिसके जीवन में दीक्षा नहीं है वह चाहे लोगों की नज़रों में कितने भी ऊँचे पहाड़ों पर रहता हो पर भीतर में असन्तुष्ट होगा, दुःखी होगा,जो दीक्षित है,,वह ईश्वर के साथ खेलनेवाला होता है, भीतर से पूर्ण तृप्त रहता है…
कबीर जी ने कहाः-
कबीरा जोगी जगत गुरु तजे जगत की आस।
जो जग का आशा करे तो जग गुरु वह दास।।
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