संसार में दो तरह से लोग प्रार्थना करते है,एक वे जो अपने अन्दर झांक कर और उस परमात्मा को पहचान कर उनसे दुआ मांगते हैं,एक वो जो बाहर किसी अकिर्ति,या चिन्ह से दुआ मांगते हैं,इन सभी को मन की एकाग्रता के अनुसार और उस भरोसे के अनुसार ही फल प्राप्त होता रहता है क्योकि कोई भी प्रार्थना निष्फल नहीं जाती,इसमें कोई भी शक की गुन्जायिश नहीं है,
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